BIG BREAKING NEWS -: इंदौर स्विच इट मामले में 4 करोड़ से ज्यादा की कथित ठगी का आरोप, कृतिका को हाईकोर्ट से राहत नहीं..!
अग्रिम जमानत याचिका खारिज; अदालत ने जांच के लिए हिरासत में पूछताछ को माना जरूरी, निजी बैंक खाते में राशि जमा होने का भी उल्लेख..!

इंदौर (MP News AGENCY ) -: स्विच इट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित आर्थिक धोखाधड़ी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कृतिका उपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले में चार करोड़ रुपए से अधिक की कथित धोखाधड़ी का आरोप है। अदालत ने विवेचना के दौरान आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए आवेदिका से हिरासत में पूछताछ की जरूरत को महत्वपूर्ण माना। 12 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
पांच-पांच लाख रुपए जमा कराने का आरोप -: मामला इंदौर के थाना पलासिया में दर्ज अपराध क्रमांक 256/2026 से संबंधित है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 316(5) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, स्विच इट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर लोगों से रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपए तक की राशि जमा कराई गई। आरोप है कि शिकायतकर्ताओं को वादे के अनुरूप पर्याप्त काम नहीं मिला। इसके चलते उन्हें ईएमआई चुकाने में परेशानी हुई। जमा सुरक्षा राशि वापस मांगने पर कथित तौर पर टालमटोल की गई।परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता आसिफ अंसारी, स्तुति बाजपेयी और मोइनुद्दीन मोमिन ने अग्रिम जमानत आवेदन का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

सेल्स मैनेजर की भूमिका पर उठे सवाल -: परिवादी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कृतिका उपाध्याय कंपनी में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं और उन्होंने शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें राशि जमा करने के लिए राजी किया था। अधिवक्ताओं के अनुसार, कुछ शिकायतकर्ताओं के साथ किए गए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर कृतिका उपाध्याय और सह-आरोपी राहुल के हस्ताक्षर हैं। जमानत आवेदन का विरोध करते हुए परिवादी पक्ष ने व्हाट्सऐप चैट की प्रतियां और अन्य दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि मामले में कृतिका की भूमिका की जांच आवश्यक है।
निजी बैंक खाते में राशि जमा होने का उल्लेख -: सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ताओं से प्राप्त राशि का कुछ हिस्सा कृतिका उपाध्याय के निजी बैंक खाते में भी जमा हुआ था। राज्य शासन की ओर से भी अपराध की गंभीरता और विवेचना की आवश्यकता का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों तथा आवेदिका की कथित भूमिका पर विचार किया। अदालत ने विवेचना के लिए आवश्यक जानकारी जुटाने के उद्देश्य से हिरासत में पूछताछ की जरूरत को महत्वपूर्ण माना और अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
राहुल भोजक गिरफ्तार, अन्य आरोपियों की तलाश -: परिवादी पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में राहुल भोजक को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है और वह जेल में है। उसे प्रकरण का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी होने की जानकारी भी परिवादी पक्ष की ओर से दी गई है।
एफआईआर के बाद नए शिकायतकर्ताओं के सामने आने का दावा -: परिवादी पक्ष के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद से कुछ अन्य लोग भी थाना पलासिया पहुंचकर अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी की जानकारी दे रहे हैं। इससे मामले में शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, नए शिकायतकर्ताओं की संख्या और कथित आर्थिक नुकसान की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब आगे क्या? -: कृतिका उपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले की विवेचना महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के दौरान कथित वित्तीय लेन-देन, शिकायतकर्ताओं से प्राप्त राशि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
MP News AGENCY की अपील: यदि आप भी इस मामले से संबंधित शिकायतकर्ता हैं, तो अपने पास मौजूद भुगतान की रसीदें, बैंक लेन-देन का विवरण, अनुबंध और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस से संपर्क करें
नोट: यह समाचार उपलब्ध विवरण और परिवादी पक्ष की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित है। सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम निष्कर्ष जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।









